आज अगर आप कोई नया स्मार्टफोन देखने जाएं, तो सबसे पहले उसकी पीछे की तरफ नजर जाती है। वहां एक कैमरा नहीं, बल्कि दो, तीन या कभी-कभी चार-पांच कैमरे दिखते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर मोबाइल में इतने कैमरे क्यों दिए जाते हैं। क्या यह सिर्फ दिखावे के लिए है या फिर हर Mobile Camera Lens का कोई अलग काम होता है।
कुछ साल पहले तक स्मार्टफोन में सिर्फ एक ही कैमरा मिलता था और उसी से फोटो, वीडियो सब कुछ हो जाता था। लेकिन जैसे-जैसे लोगों की फोटो और वीडियो को लेकर उम्मीदें बढ़ीं, वैसे-वैसे फोन कंपनियों ने कैमरा तकनीक को भी आगे बढ़ाया। फोन बहुत पतले होते हैं, इसलिए उनमें DSLR जैसे बड़े जूम लेंस या मोटर फिट नहीं किए जा सकते। इसी कमी को पूरा करने के लिए मोबाइल कंपनियों ने एक कैमरे की जगह कई कैमरे देना शुरू किया।
सिंगल कैमरे से मल्टी कैमरा तक
पहले के स्मार्टफोन में एक ही कैमरा होता था, जो हर तरह की फोटो लेने की कोशिश करता था। लेकिन उस कैमरे की भी अपनी सीमाएं थीं। दूर की चीज साफ नहीं आती थी, ग्रुप फोटो में सबको फ्रेम में लेना मुश्किल होता था और बैकग्राउंड ब्लर जैसा इफेक्ट तो नामुमकिन था। जब मल्टी कैमरा सेटअप आया, तब मोबाइल फोटोग्राफी की दुनिया बदल गई। अब हर Mobile Camera Lens एक खास काम के लिए दिया जाने लगा। कोई लेंस दूर की चीजों के लिए है, कोई ज्यादा चौड़ा एरिया कवर करता है और कोई बहुत नजदीक की चीजों की फोटो लेने में मदद करता है।
वाइड एंगल या मेन कैमरा लेंस का रोल
फोन में जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कैमरा होता है, वही वाइड एंगल या मेन कैमरा कहलाता है। यही कैमरा रोजमर्रा की ज्यादातर फोटो खींचता है। चाहे आप किसी की फोटो लें, खाना क्लिक करें या सामान्य वीडियो बनाएं, मेन लेंस ही काम आता है। इस Mobile Camera Lens का फोकल लेंथ ऐसा होता है कि यह हर तरह की फोटो के लिए बैलेंस्ड रहता है। इसमें कलर, डिटेल और लाइट का संतुलन अच्छा होता है, इसलिए यही कैमरा सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
अल्ट्रा वाइड लेंस क्यों है जरूरी
कई बार ऐसा होता है कि आप किसी खूबसूरत जगह पर खड़े होते हैं, लेकिन कैमरे में पूरा सीन नहीं आ पाता। या फिर किसी शादी या पार्टी में बहुत सारे लोग होते हैं और सबको एक फोटो में फिट करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में अल्ट्रा वाइड Mobile Camera Lens काम आता है। इस लेंस की फोकल लेंथ छोटी होती है, जिससे यह ज्यादा चौड़ा एरिया कैप्चर करता है। लैंडस्केप फोटो, बड़ी बिल्डिंग, ग्रुप फोटो और ट्रैवल के दौरान यह लेंस बहुत काम का साबित होता है। हालांकि अल्ट्रा वाइड फोटो में किनारों पर हल्का टेढ़ापन दिख सकता है, लेकिन आजकल फोन का सॉफ्टवेयर इसे काफी हद तक ठीक कर देता है।
टेलीफोटो लेंस और असली जूम
अक्सर लोग जूम को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। फोन में जो पिंच करके जूम किया जाता है, वह ज्यादातर डिजिटल जूम होता है। डिजिटल जूम में फोटो को काटकर बड़ा किया जाता है, जिससे तस्वीर धुंधली हो जाती है। टेलीफोटो Mobile Camera Lens इसी समस्या का हल है। यह लेंस लंबी फोकल लेंथ का इस्तेमाल करता है, जिससे दूर की चीजें बिना क्वालिटी खराब किए पास नजर आती हैं। इसे ऑप्टिकल जूम कहा जाता है। अगर आप किसी स्टेज पर खड़े व्यक्ति की फोटो लेना चाहते हैं या दूर रखी किसी चीज को साफ देखना चाहते हैं, तो टेलीफोटो लेंस सबसे बेहतर रहता है।
पोर्ट्रेट मोड और डेप्थ सेंसर
आजकल हर कोई फोटो में बैकग्राउंड ब्लर यानी बोकह इफेक्ट चाहता है। यह वही इफेक्ट है, जिसमें सामने वाला व्यक्ति साफ दिखता है और पीछे का हिस्सा हल्का धुंधला हो जाता है। इस इफेक्ट के लिए फोन को यह समझना जरूरी होता है कि फोटो में कौन सी चीज आगे है और कौन सी पीछे। इसके लिए फोन एक साथ दो Mobile Camera Lens का इस्तेमाल करता है। आमतौर पर एक मेन कैमरा और दूसरा डेप्थ सेंसर या टेलीफोटो लेंस होता है। फोन का प्रोसेसर दोनों कैमरों से मिली जानकारी को मिलाकर फोटो का 3D मैप बनाता है। इसी के आधार पर सॉफ्टवेयर तय करता है कि किस हिस्से को ब्लर करना है और किसे साफ रखना है।
कम रोशनी में बेहतर फोटो
कम रोशनी में फोटो लेना हमेशा से चुनौती रहा है। ऐसे में फोटो दानेदार हो जाती है और डिटेल कम दिखती है। इसी समस्या को हल करने के लिए कुछ फोन में मोनोक्रोम सेंसर दिया जाता है। मोनोक्रोम Mobile Camera Lens सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट फोटो नहीं खींचता, बल्कि यह ज्यादा रोशनी कैप्चर करने में मदद करता है। क्योंकि इसमें कलर फिल्टर नहीं होते, यह लाइट को ज्यादा अच्छे से पकड़ लेता है। फोन का सॉफ्टवेयर इस मोनोक्रोम सेंसर से मिली लाइट की जानकारी को मेन कैमरे के कलर डेटा के साथ मिलाकर एक बेहतर फोटो बनाता है, जो अंधेरे में भी साफ और शार्प दिखती है।
मैक्रो लेंस
क्या आपने कभी पत्ती की नसें, फूल के अंदर की बनावट या किसी छोटे कीड़े की आंखों को करीब से देखा है। यह काम मैक्रो Mobile Camera Lens करता है। मैक्रो लेंस फोन को बहुत नजदीक की चीजों पर फोकस करने की क्षमता देता है। आम कैमरा इतनी पास की चीज पर फोकस नहीं कर पाता, लेकिन मैक्रो लेंस कुछ सेंटीमीटर की दूरी से भी साफ फोटो ले सकता है। हालांकि मैक्रो कैमरा हर यूजर के लिए जरूरी नहीं होता, लेकिन जिन्हें नेचर, फूल या छोटी चीजों की फोटोग्राफी पसंद है, उनके लिए यह लेंस काफी मजेदार साबित होता है।
ज्यादा कैमरे मतलब बेहतर फोटो?
यह जरूरी नहीं है कि फोन में जितने ज्यादा कैमरे होंगे, फोटो उतनी ही अच्छी आएगी। असली फर्क कैमरे की क्वालिटी, सेंसर, लेंस और सॉफ्टवेयर प्रोसेसिंग से पड़ता है। कई बार दो अच्छे कैमरे वाला फोन, चार कमजोर कैमरे वाले फोन से बेहतर फोटो दे देता है। इसलिए फोन खरीदते समय सिर्फ कैमरों की संख्या नहीं, बल्कि हर Mobile Camera Lens का इस्तेमाल और उसकी क्वालिटी देखना ज्यादा जरूरी है।
आने वाले समय में मोबाइल कैमरा
मोबाइल कैमरा तकनीक लगातार आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में कैमरे और भी स्मार्ट होंगे। सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फोन खुद समझने लगेंगे कि किस सीन में कौन सा लेंस सबसे बेहतर रहेगा। आज जो काम DSLR करता था, वह धीरे-धीरे मोबाइल फोन भी करने लगे हैं। यही वजह है कि Mobile Camera Lens अब सिर्फ एक फीचर नहीं, बल्कि फोन खरीदने का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
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सामान्य स्पेसिफिकेशन और काम
| कैमरा लेंस प्रकार | काम |
|---|---|
| वाइड एंगल (मेन) | रोजमर्रा की फोटो और वीडियो |
| अल्ट्रा वाइड | ज्यादा चौड़ा एरिया कैप्चर करना |
| टेलीफोटो | ऑप्टिकल जूम और दूर की फोटो |
| डेप्थ सेंसर | पोर्ट्रेट और बैकग्राउंड ब्लर |
| मोनोक्रोम सेंसर | कम रोशनी में बेहतर डिटेल |
| मैक्रो लेंस | बहुत नजदीक की चीजों की फोटो |


